विद्याभारती e पाठशाला

Lesson- 24 श्री शनि चालीसा

Lesson- 24 श्री शनि चालीसा

01श्री शनि चालीसा

हिंदू धर्म में शनि देव को दंडाधिकारी माना गया है।सूर्यपुत्र शनिदेव के बारे में लोगों के बीच कई मिथ्य हैं।लेकिन मान्यता है कि भगवान शनिदेव जातकों केकेवल उसके अच्छे और बुरे कर्मों का ही फल देते हैं।शनि देव की पूजा अर्चना करने से जातक के जीवनकी कठिनाइयां दूर होती है। शिव पुराण में वर्णित हैकि अयोध्या के राजा दशरथ ने शनिदेव को “शनिचालीसा” से प्रसन्न किया था। शनि चालीसा निम्न है।शनि साढ़ेसाती और शनि महादशा के दौरानज्योतिषी शनि चालीसा का पाठ करने की सलाह देतेहैं।

श्री शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

हे माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश, आपकी जयहो। आप कल्याणकारी है, सब पर कृपा करने वाले हैं,दीन लोगों के दुख दुर कर उन्हें खुशहाल करें भगवन।हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु,हमारी प्रार्थना सुनें, हे रविपुत्र हम पर कृपा करें वभक्तजनों की लाज रखें।

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Lesson- 24 श्री शनि चालीसा
02. जैसी करनी वैसी भरनी – कर्म भोग ..!!!

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