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Lesson – 13 श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

Lesson – 13 श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
आप विचार कर रहे होंगे.. संस्कृति बोध के अध्याय में सप्तसती पाठ… जी हां. प्रकृति के रहस्य एवं सृष्टी की उत्पति के रहस्यों को समझना है तो शास्त्रों का सहारा लेना ही होगा.. और सप्तसती से अच्छा माध्यम कुछ हो नहीं सकता.. माना यह पूर्णतः धार्मिक ग्रन्थ है.. किन्तु भारतीय संस्कृति का बोध इसके बिना अधुरा है.. अध्ययन अवश्य कीजिये..

पहला अध्याय – Chapter First – Durga Saptashati
(महर्षि ऋषि का राजा सुरथ और समाधि को देवी की महिमा बताना)
महर्षि मार्कण्डेय बोले – सूर्य के पुत्र सावर्णि की उत्पत्ति की कथा विस्तारपूर्वक कहता हूँ सुनो, सावर्णि महामाया की कृपा से जिस प्रकार मन्वन्तर के स्वामी हुए, उसका भी हाल सुनो। पहले स्वारोचिष नामक राज्य था। वह प्रजा को अपने पुत्र के समान मानते थे तो भी कोलाविध्वंशी राजा उनके शत्रु बन गये। दुष्टों को दण्ड देने वाले राजा सुरथ की उनके साथ लड़ाई हुई, कोलाविध्वंसियों के संख्या में कम होने पर भी राजा सुरथ युद्ध में उनसे हार गए। तब वह अपने नगर में आ गये, केवल अपने देश का राज्य ही उनके पास रह गया और वह उसी देश के राजा होकर राज्य करने लगे किन्तु उनके शत्रुओं ने उन पर वहाँ आक्रमण किया।

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Lesson – 13 श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
2- बोधकथा

विडियो देखें…
https://www.youtube.com/watch?v=kSO1UVxxdD8

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