विद्याभारती e पाठशाला

संस्कृति बोध 7 संस्कृति 3

विद्याभारती E पाठशाला
संस्कृति बोध 7
—————————
हिन्दू पंचांग की उत्पत्ति वैदिक काल में ही हो चुकी थी। सूर्य को जगत की आत्मा मानकर उक्त काल में सूर्य एवं नक्षत्र सिद्धांत पर आधारित पंचांग होता था। वैदिक काल के पश्चात आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कर आदि जैसे खगोलशास्त्रियों ने पंचांग को विकसित कर उसमें चन्द्र की कलाओं का भी वर्णन किया।
वेदों और अन्य ग्रंथों में सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी और नक्षत्र सभी की स्थिति, दूरी और गति का वर्णन किया गया है। स्थिति, दूरी और गति के मान से ही पृथ्वी पर होने वाले दिन-रात और अन्य संधिकाल को विभाजित कर एक पूर्ण सटीक पंचांग बनाया गया है। जानते हैं हिन्दू पंचांग की अवधारणा क्या है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *