विद्याभारती e पाठशाला

खेल-खेल में शिक्षा

खेल-खेल में शिक्षा
स्वाभाविक रूप से बचपन खेल-कूद के लिये होता है. छात्रों की गतिविधियां उनके परिवेश और रूचि पर निर्भर करती है. यही कारण है कि किताबी ज्ञान उन्हें अरूचिकर लगता है. हर समय शिक्षक द्वारा पढ़ाये गये पाठ, होम वर्क, परीक्षा आमतौर पर छात्रों को बोझिल लगने लगती है. संभव है, ऐसे में किताबों और विद्यालय से उसे ऊब होने लगे. यह सर्वविदित है कि गणित और विज्ञान जैसे विषय छात्रों को नीरस लगते हैं. विद्यालयी शिक्षा शुरू होते ही छात्रों को हर समय उनके अभिभावक पढ़ने के लिये प्रेरित करते नजर आते हैं. अक्सर सुनने को मिलता है – खेल में ही दिमाग लगा रहता है, किताबें तो छू कर भी नही देखता. कुछ अभिभावक ऐसे भी होते हैं, जिन्हे अपनी आजीविका के चलते बच्चों की शिक्षा पर उनका न तो ध्यान होता है और न ही रूचि. परिणामस्वरूप छात्र किताबों से दूर भागने लगते हैं या उनके हाथ में किताब होती है लेकिन उनका मस्तिष्क किसी और लोक में विचरण कर रहा होता है. इन्हीं समस्याओं से मुक्ति पाने और छात्रों को शिक्षित करने के लिये समय-समय पर नवाचारों का जन्म होता रहा है. ऐसा ही एक नवाचार है – खेल-खेल में शिक्षा यानी उन खेलों के माध्यम से शिक्षा जिनमें छात्रों की स्वाभाविक रूचि होती है।

खेल खेल में शिक्षा के 3 पीडीएफ का अध्ययन कीजिये एवम अपने सुझाव अथवा विद्यालय में अपने इस प्रकार कोई प्रयोग किया हो तो अवगत कराइये।






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