विद्याभारती e पाठशाला

शिक्षा दर्शन- 11 पाठ्य सहगामी क्रियाएं

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शिक्षण कौशल-11
पाठ्य सहगामी क्रियाएं
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“छात्र जीवन में पाठ्य सहगामी क्रियाएं”
पाठ्य सहगामी क्रियाएं छात्र जीवन के लिए महत्वपूर्ण है और इन्हीं के माध्यम से छात्र अपनी प्रतिभा को सभी के सामने ला पाता है। शिक्षा समाज में, समाज के द्वारा समाज के लिए दी जाती है। शिक्षक और समाज का घनिष्ठ संबंध है। शिक्षा समाज में परिवर्तन लाने का सार्थक एवं सशक्त साधन है। शिक्षा की प्रक्रिया के द्वारा ही नए युवकों में ऐसे गुणों का विकास किया जा सकता है जो स्वस्थ समाज के लिए वांछनीय है। बालक के सर्वांगीण विकास हेतु निम्न पक्षों के विकास आवश्यक है- शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावात्मक विकास । पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय के विषयों के शिक्षण में छात्रों के ज्ञानात्मक पक्ष का विकास अधिक होता है। लेकिन भावात्मक और क्रियात्मक पक्षों का विकास नहीं हो पाता इसलिए इन पक्षों के विकास के लिए पाठ्य सहगामी क्रियाओं का सहारा लिया जाता है।

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