विद्याभारती e पाठशाला

Lesson 27 शिक्षणेत्तर गतिविधियों की कार्य योजना

Lesson 27 शिक्षणेत्तर गतिविधियों की कार्य योजना
शिक्षणेत्तर गतिविधियों की कार्य योजना
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हमारी योजना में प्रत्येक कार्य को सुनियोजित रुप से संपन्न कराने हेतु कार्य योजना तैयार की जाती है ।
प्रभावी व संस्कार युक्त शिक्षा प्रदान करने का हमारा उद्देश्य और दायित्व है ।
ज्ञान को अनुभूत ज्ञान में गतिविधियों के माध्यम से बदला जाता है, शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान या केवल
वार्षिक परीक्षा परिणामकारी ना बने अपितु जीवन में परिणामकरी बने।
छात्रों में आत्मविश्वास, गतिशीलता ,सकारात्मकता ,व्यक्तित्व विकास व प्रगटीकरण,
क्षमताओं का सदुपयोग नागरिकता का भाव ,विश्व बंधुत्व की भावना का विकास,
व्यक्तिगत जीवन शैली का विकास, नैतिकता का विकास, मानवीयता का ज्ञान ,
जीवन मूल्यों से सुशोभित बालक का सर्वांगीण विकास शिक्षण के व्यवहारिक व
जीवन उपयोगी पक्ष का विकास।
हमारा विद्यालय हमारी योजना समाज में व समाज विद्यालय में पहुंचे, इस प्रकार की
गतिविधि आयोजित करना । इस कारण हमारी पहचान प्रथक से है। इसका ठीक प्रकार
से ज्ञान कराना हमारा विद्यालय गतिविधियों का आलय है। व सामाजिक चेतना का केंद्र बने ,
इस विचार को पुष्ट तथा द्रवीकरण स्वरूप देने के लिए शिक्षणेत्तर गतिविधियों का होना अत्यंत आवश्यक है।
शिक्षणेत्तर गतिविधियों में प्राचार्य की भूमिका महत्वपूर्ण है, अपने विचार शक्ति कल्पना को साकार रुप देने के लिए संगठनात्मक भाव का विस्तार करने के लिए विद्यालय में गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन हेतु मार्गदर्शन के लिए अपने अनुभवों को आधार मानकर क्रिया रूप देने का कार्य प्राचार्य का होता है । प्राचार्य कुशलतापूर्वक मार्गदर्शन करता है।
जो अपनी योजना के सभी कार्यों को समय पर प्रभावी रूप से संपन्न कराने की महती भूमिका रखता है पांच आधारभूत विषय बाद सभी केंद्रीय विषयों को ध्यान में रखकर योजना का निर्माण करना महत्वपूर्ण है।
गतिविधियों को कार्य योजना में इस प्रकार विभाजित किया जा सकता है।
दैनिक कार्य योजना
साप्ताहिक कार्य योजना
मासिक कार्य योजना
वार्षिक कार्य योजना
त्रिवार्षिक या दीर्घकालिक कार्य योजना

Lesson 27 शिक्षणेत्तर गतिविधियों की कार्य योजना
शिक्षक कर्त्तव्य बोध 

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