विद्याभारती e पाठशाला

Lesson 20 – विद्यालय का संस्कारक्षम वातावरण

Lesson 20 – विद्यालय का संस्कारक्षम वातावरण
1-विद्यालय का संस्कारक्षम वातावरण
विद्यालय का संस्कारक्षम वातावरण कैसा हो. प्रधानाचार्य एवं आचार्य इस में क्या भूमिका निभा सकते है..
इस विषय पर आज शिक्षण कौशल का पाठ है..
अध्ययन का अपने विद्यालय में कोई इस विषय में कार्य चल रहा हो तो कमेंट्स बॉक्स में अवश्य लिखिए.

2-शैक्षिक शोध एवं क्रियाशोध
मनुष्य का आज तक का विकास शोधात्मकवृत्ति का परिणाम है। शोध किसी ज्ञात चीज के कार्य कारण सम्बन्ध को जानना है। निष्चत तकनीकि एवं प्रयोगविधि से तथ्य एवं कार्य-कारण सम्बन्ध को जाने की पद्धति है इसे सहज भाषा में खोज कहते है। जैसे मनुष्य ने अग्नि की खोज की । अग्नि-पत्थर से पत्थर रगड़कर ऊर्जा पैदा करना खोज है।
पदार्थ के सूक्ष्मकणों के बीच धनात्मक एवं ऋणात्मक आवेषों एवं उनके बीच चुम्बकीय प्रभावों से ऊर्जा पैदा होती है यह जानाना कि एक प्रकार की ऊर्जा को दूसरे प्रकार की ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है इस सिद्धान्त को जानना शोध है।

Lesson 20 – विद्यालय का संस्कारक्षम वातावरण
2-शैक्षिक शोध एवं क्रियाशोध

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